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हमारे पर्यटन का आधार बन सकती है भारतीय संस्कृति प्रो0 सिंह

119 Days ago
| by Loktantrik Media

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शाहजहाँपुर भारत एक बहु-विविधतापूर्ण संस्कृति वाला देश है। धार्मिक औरसांस्कृतिक वैविध्यता इस देश को संसार के सभी देश से ज्यादा श्रेष्ठबनाती है। भारतीय संस्कृति हमारे पर्यटन का आधार बन सकती है। यह विचारदिल्ली स्कूल आफ इक्नामिक्स के प्रो0 बी0पी0 सिंह ने व्यक्त किये। प्रो0 सिंह एस0एस0 पी0जी0 काॅलेज में, पर्यटन व्यावसायीकरण और मानवीय प्रसन्नताःचुनौतियां और सम्भावनायें विषय पर आयोजित आठवें स्वामी शुकदेवानन्दअन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार के उदघाटन सत्र के मुख्य अतिथि के रुप में अपनेविचार व्यक्त कर रहे थे।
प्रो0 सिंह ने कहा कि भारत बुद्ध, जैन, हिन्दू, सिक्ख सहित अनेक धर्मों की भूमि है। इसकी इस वैविध्यता और महानताका प्रचार हम दुनिया के समक्ष करने में असफल रहे हैं। अपनी सांस्कृतिकबहुलता से हम पर्यटन को बढावा दे सकते हैं, परन्तु इसके लिये हमे भारत कीअच्छी छवि दुनिया के सामने रखनी होगी। सेमिनार की अध्यक्षता करते हुयेपूर्व केन्द्रीय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा कि प्रसन्नताकी बात में मानव जीवन के सब आयाम सिमट जाते हैं। मानव जीवन सुख की तलाष है, सुख की प्राप्ति के लिये मनु-स्मृति सूत्र देती है कि विद्या से विनयप्राप्त होती है, विनय से पात्रता, पत्रता से धन और धन से धर्म और धर्म सेसुख की प्राप्ति होती है। यहां धर्म महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के तमामलोग मानते हैं कि धन से सुख मिलता है परन्तु धन सुख नहीं है, सुख का साधनहै। भोग और संयोग से बेहतर योग है, यह बात हमे समझनी होगी।
मुख्य वक्ता
इलाहाबाद विष्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के प्रो0 जे0एन0 मिश्रा ने कहा किवाणिज्यवाद और भौतिकवाद के बीच मानव सुख बहुत कठिन दिखायी दे रहा है। मानवके जीवन में हर्ष और विषाद है। दूसरे विषिष्ट अतिथि भारतीय पर्यटन संस्थानग्वालियर के निदेषक प्रो0 संदीप कुलश्रेष्ठ ने कहा कि पर्यटन मानव सभ्यताके जितना पुराना है, भारत में दो तरह का पर्यटन प्रमुख है, धार्मिक औरसामाजिक। पर्यटन तनाव प्रबंधन का उपाय हो सकता है, इण्डोनेषिया के डाॅ0 कमालुद्दीन ने हिन्दी मंे दिये अपने भाषण में कहा कि भारत और इण्डोनेषियाकी संस्कृति गंगा जमुनी है, भारत के बारे में जाने बिना इण्डोनेषिया कोजानना सम्भव नहीं है और इण्डोनेषिया को जानेबिना भारत इस अवसर पर ईरान केमाजिर मो0 याहिया ने भी अपने विचार व्यक्त किये। इससे पूर्व अतिथियों नेस्वामी शुकदेवानन्द जी महाराज के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।कार्यक्रम का प्रारम्भ अतिथियों ने दीप प्रज्जलन कर किया, संस्कृतमहाविद्यालय के नीरज दीक्षित ने मंगलाचरण किया। अतिथियों का स्वागत डाॅ0 आलोक मिश्र, डाॅ0 राजीव अग्रवाल, डाॅ0 दीपक मिश्र, डाॅ0 अंकित अवस्थी, डाॅ0 आलोक सिंह, डाॅ0 प्रभात शुक्ल, डाॅ0 आदर्ष पाण्डेय और डाॅ0 एम0के0 वर्माने अंगवस्त्र, बुके और स्मृति चिन्ह देकर किया। उदघाटन सत्र में संगीतविभाग की छात्राओं ने डाॅ0 प्रतिभा सक्सेना के निर्देषन में सरस्वती वन्दनाव स्वागत गीत प्रस्तुत किये। उदघाटन सत्र में प्रमुख रुप से जम्मू कष्मीरके प्रो0 दीपकराज गुप्ता और प्रो0 रियाज कुरैषी, दिल्ली के प्रो0 डाॅ0 अजयवर्मा, बनारस से डाॅ0 नरेष कुमार, यमन से डाॅ0 अली मसूद सालेह अलबानी, यूक्रेन से मारिया सिंगाक, नेपाल की मंजू चैधरी, माॅरिसष की मनीषी गनेष, थाईलैण्ड के नाटाबुट, वियतनाम के त्रान थी, नोगाक थाऊ, दक्षिण अफ्रिका केबोंगेका सैजी, अफगानिस्तान के फरीदुल्ला सहित लगभग सत्रह देषों केप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनका अंग वस्त्र और प्रतीक चिन्ह देकर स्वागत कियागया। इस अवसर पर ई-सोविनियर और सेमिनार में आये शोध पत्रों की प्रकाषितपुस्तक का विमोचन भी अतिथियों द्वारा किया गया। उदघाटन सत्र का संचालनसंयोजक डाॅ0 अनुराग अग्रवाल और डाॅ0 अभिजीत मिश्र ने किया। सत्र के अन्तमें आभार प्रबन्ध समिति के सचिव रामचन्द्र सिंघल ने व्यक्त किया। उदघाटनसत्र के उपरान्त आयोजित चार तकनीकी सत्रों में में विभिन्न विषयों पर देषविदेष से पधारे शोधार्थियों और प्राध्यापकों ने लगभग 150 शोधपत्र प्रस्तुतकिये।
 सेमिनार के सफल आयोजन में डाॅ
0 मीना शर्मा, डाॅ0 प्रभात शुक्ला, डाॅ0 शालीन कुमार सिंह, डाॅ0 रत्ना गुप्ता, डाॅ0 आदित्य कुमार सिंह, डाॅ0 प्रषान्त अग्निहोत्री, डाॅ0 विषाल पाण्डेय, डाॅ0 मधुकर श्याम शुक्ल, डाॅ0 पूनम, डाॅ0 राजबहादुर यादव, डाॅ0 अजीत चारग, डाॅ0 आदर्ष पाण्डेय, मनोजअग्रवाल आदि का विषेष सहयोग रहा। शाम के सांस्कृतिक सत्र में संगीत विभागकी विभागाध्यक्ष डाॅ0 कविता भटनागर और डाॅ0 प्रतिभा सक्सेना के निर्देषनमें महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने भारत की सांस्कृतिकविषिष्टताओं सेसजे हुये रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये।

 

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